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'पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुवा, पंडित भया न कोई' भाव स्पष्ट कीजिए।

'पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुवा, पंडित भया न कोई' भाव स्पष्ट कीजिए।

The answer is :

इसका अर्थ है कि पोथियाँ एवं वेद पढ़-पढ़कर संसार थक गया, लेकिन आज तक कोई भी पंडित नहीं बन सका; अर्थात् ईश्वर के प्रेम के बिना, उसकी कृपा के बिना कोई भी पंडित नहीं बन सकता तत्वज्ञान की प्राप्ति नहीं कर सकता।

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